सम्मोहन विद्या

हिप्नोटिज्म (सम्मोहन) एक ग्रीक शब्द हिप्नोस से बनाया गया है जिसका अभिप्राय नींद होता है। अपने नाम से विपरीत यह नींद की स्थिति न होकर ध्यान की एक अवस्था है जिसमें हमारे मस्तिष्क की लहरें बीटा से अल्फा में परिवर्तित हो जाती हैं। यह एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसका प्रभाव शरीर पर नापा जा सकता है। अतः सम्मोहन को जादू या कोई अवैज्ञानिक कार्य समझना उचित नहीं है। सम्मोहन की अवस्था में नये न्यूरो-पाथ बनाकर व्यवहार को प्रभावित किया जा सकता है।

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सम्मोहन विद्या भारतवर्ष की प्राचीनतम और सर्वश्रेष्ठ विद्या है जिसकी जड़ें सुदूर गहराईयों तक स्थित हैं। भारत वासीयों का जीवन अध्यात्म प्रधान रहा है और भारत वासीयों ने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में दर्शन और अध्यात्म को सर्वाधिक महत्व दिया है। इसीलिए सम्मोहन विद्या को भी प्राचीन समय से ‘प्राण विद्या’ या ‘त्रिकालविद्या’ के नाम से पुकारा जाता है। भारतीय दर्शन और भारतीय अध्यात्म, योग और उसकी शक्तियों से जुड़ा हुआ है।

सम्मोहन एक प्राकृतिक अवस्था है जिसे सभी लोग दिन में कई बार अनुभव करते हैं। यह बच्चों, युवाओं और प्रौढ़ों पर समान रूप से प्रभावी हैं। हर कोई सामान्य व्यक्ति जो संवाद को समझ सकता है, उसका अनुकरण कर सकता है, सम्मोहन की अवस्था का अनुभव कर सकता है। सम्मोहन मनोविज्ञान का एक अवयव है। सम्मोहन का आधार मन की कार्य क्षमता है अर्थात् मन जो बताता है उसको सुधारा भी जा सकता है। हमारा मन कम्प्यूटर की तरह कार्य करता है। कम्प्यूटर के साफ्टवेयर में परिवर्तन करके इसके कार्य में भी परिवर्तन किये जा सकते हैं। अगर हम अपने आप को कमजोर व बीमार मानते हैं तो हम अपने आप को शक्तिशाली और समर्थ भी मान सकते हैं। इस उपचार से मनुष्य का दृष्टिकोण स्वस्थ होता है और उसका स्वस्थ विकास होता है। सम्मोहन का मुख्य तौर पर तीन प्रकार से प्रयोग होता है। स्वयं में सुधार लाना, मनोरंजन करना तथा उपचार करना। कोई भी व्यक्ति स्वयं-सम्मोहन करके अपने विकास के लिए कार्य कर सकता है। दूसरा उपयोग मनोरंजन कार्य करना जैसे स्टेज शो, पार्टी शो और नुक्कड़ शो करना इत्यादि। मनोरंजन कार्यक्रमों ने सम्मोहन को लोकप्रियता प्रदान की है और जादू जैसे विचार भी लोगों के मन में पैदा कर दिये हैं। तीसरा और सबसे अधिक सम्मोहन का प्रयोग है उपचार हेतु। सम्मोहन से अनेक प्रकार के उपचार भी संभव हैं जैसे मोटापा, नपुंसकता, पढ़ाई में ध्यान, खेलों में प्रभाव, चिंता, डर, आत्मविश्वास, निर्णय लेना, आदत सुधार इत्यादि। सम्मोहन का प्रयोग पराभौतिक कार्यों जैसे पिछले जन्म से जुड़ना, भूत-प्रेत उपचार, पुण्य आत्माओं से सहयोग लेना इत्यादि के लिए भी प्रयोग किया जाता है।

सम्मोहन चिकित्सा

प्राय: सभी क्रियागत रोगो मे सम्मोहन लाभदायक है कुछ ऐसे शारीरक रोग होते है जिनके मूल कारण तो मनोवैज्ञानिक होते है, लेकिन उनके साथ शारीरक कारण भी मिश्रित होते है, ऐसे रोगो मे शारीरक चिकित्सा भी होनी चाहिए । सम्मोहन चिकित्सा द्वारा बुरी आदते शराब, सिगरेट से पुर्ण छुटकारा दिलाया जा सकता है । सम्मोहन चिकित्सा द्वारा अनेक निम्न रोगो मे लाभ होता है । सिरदर्द, कमर दर्द, अनिद्रा, मानसिक तनाव, विषाद, लकवा, मिर्गी,   कमजोर यादाश्त, हकलाना, तुतलाना, ह्रदय रोग, डर, नंपुसकता, कब्ज, मोटापा, कमजोर आखें, मनोविकार इत्यादि।

बहुत से लोगो की धारणा है की केवल कमजोर इच्छा-शक्ति वाले व्यक्ति को ही सम्मोहित किया जा सकता है, लेकिन यह गलत है, इसके विपरीत द्र्ड इच्छा शक्ति वाले व्यक्ति को आसानी से सम्मोहित किया जा सकता । हर व्यक्ति को सम्मोहित करने का तरीका समान नही हो सकता । व्यक्ति के स्वभाव पर निर्भर रहता है ।

सम्मोहन की तन्द्रा मे कभी कभी पात्र को वे सुझाव भी दिए जाते है जिनका संबंध सत्य से परे होता है सम्मोहन के द्वारा व्यक्ति को उसके बचपन की किसी भी अवस्था तक ले जाया जा सकता है अपने गर्भावस्था तक के विषय मे व्यक्ति बता सकता है । इसके अतिरिक्त व्यक्ति जब जिस उम्र मे ले जाया जाए वह अपनी इस अवस्था की सारी छिपी या प्रगट बाते बतला देगा 76 प्रतिशत तक बातें इनमे सही निकलती है । सम्मोहन मे सम्मोहन करने वाले और सम्मोहित किए जाने वाले के एक तरह का संबंध जुड़ जाता है । जो भी सुझाव वह देता है पात्र सहजता से मानता चला जाता है ।

इसी तरह शराब, जुआ आदि बुरी लतों से व्यक्ति आसानी से मुक्त हो सकता है मानसिक व्याधियां ही बहुत सी व्याधियो की जड़ है मानसिक रुप से यदि व्यक्ति को स्वस्थ, प्रफ़ुल्ल रखा जा सके तो संसार की आधि से अधिक बुराईयां समाप्त हो सकती है । हमारे मन एवं मस्तिष्क में बहुत सी ग्रन्थियां पैदा हो जाती है सम्मोहन से उनका कारण ढुंढ कर उनका निवारण किया जा सकता है बहुत सी पीड़ाओं एंव बिमारियों का जन्म हमारे विश्वास एंव संवेग के कारण होता है महिलाओं मे बचपन से यह विश्वास भर दिया जाता है कि प्रसव के समय उन्हे अत्यधिक कष्ट का सामना करना पड़ता है यह बात हर बालिका के मन मे घर कर जाती है । इसलिए प्रसव के दौरान उसका अचेतन उसी के दर्द के अनुसार दर्द महसुस करने के लिए विवश करता है संसार के दुसरे कि स्त्रियों के अनुभवो से यह स्पष्ट हो गया है कि प्रसव के समय स्त्री को बहुत अधिक दर्द महसुस करने कि जरुरी नही । विभिन्न अंगो को सम्मोहन द्वारा सुन्न करके आसानी से आप्रेशन किया जा सकता है रोगी को पता ही नही चलेगा की आप्रेशन किया जा रहा है मेरे पास एक ऐसा बालक आया जो मानसिक रोगी था ।

सम्मोहन चिकित्सा तभी चिरकालिक सफ़ल सिद्ध हो सकती है जब रोगी के रोग से संबंधित लोगो की भी स्वभाव परिवर्तन हेतु चिकित्सा की जाए। अनेक विद्दार्थियों की स्मरण शक्ति मे चम्तकारिक सुधार सम्मोहन चिकित्सा के बाद आया । सम्मोहन द्वारा कार्यक्षमता मे भी वृद्धि कुछ लोगो मे की गई। आजकल रुस, अमेरिका, फ़्रांस आदि देशो मे सम्मोहन के माधयम से बहुत कार्य किए जा रहे है। किसी व्यक्ति को नौकरी पर रखने से पुर्व उसे सम्मोहित किया जाता है और सुझाव दिए जाते है कि उस क्षेत्र मे अधिक कुशलता से कार्य करने के लिए उसे क्या क्या करना चाहिए। बहुत सी जगहों मे तो अभिनेताओं, लेखको और चित्रकारो को भी सुझाव दिए जा रहे है, ताकि वे अपन क्षेत्र मे बहुत अधिक सफ़लता प्राप्त करें सकें । कम समय मे विद्दार्थी को अधिक से अधिक सिखाने के लिए भी सम्मोहन का सहारा लिया जा रहा है रोग 2 प्रकार के होते है।

एक वे जिनके कारण और कार्यक्षेत्र पुर्णत: शारीरक होते है इन्हे शरीर रोग कहा जाता है। दुसरे वे जिनके मूलत: मनौविज्ञानिक होते है, लेकिन लक्षण पुर्णत: शारीरक होते है उनमें सम्मोहन से कोई लाभ नही होता । हां आपरेशन, दंत, प्रसुति आदि मे सम्मोहन द्वारा उनको पीड़ारहित बनाया जा सकता है अनेक शारीरक रोग ऐसे भी होते है जिनके कारण मनौविज्ञानिक होते है ऐसे रोगो को क्रियागत्त रोग (फ़लस्वरुप डिसीस) कहते है । प्राय: सभी क्रियागत रोगो मे सम्मोहन लाभदायक है कुछ ऐसे शारीरक रोग भी होते है जिनके मूल कारण तो मनौविज्ञानिक होते है, लेकिन उसके साथ कुछ शारीरक कारण भी मिश्रित होते है, ऐसे रोगो मे शारीरक चिकित्सा के साथ सम्मोहन चिकित्सा होनी चाहिए । सम्मोहन चिकित्सा द्वारा बुरी आदते शराब, सिगरेट से पुर्ण छुटकारा दिलाया जा सकता है सम्मोहन चिकित्सा द्वारा अनेक रोगी निम्न रोगो से लाभान्वित हुए।
सिरदर्द, कमर दर्द, पीठ दर्द, अनिद्रा, मानसिक तनाव, विषाद, लकवा, मिर्गी, कमजोर यादाश्त, हकलाना, तुतलाना, ह्रदय रोग, डर, नपुंसकता, कब्ज, मोटापा, कमजोर आखें, मनोविकार एंव अन्य ।

अपराधियों के अपराध का पता लगाने मे सम्मोहन बहुत उपयोगी सिद्ध हो रहा है अपराधी को तन्द्रा की स्थिति मे पहुचाकर उसके जीवन के सारे अज्ञात रहस्य उजागर किए जा सकते है मैने बहुत से रोगियो का इलाज टेलीफ़ोन द्वारा भी किए है वह दिन दुर नही जब सम्मोहन चिकित्सा अपने क्षेत्र मे अस्वस्थ और स्वस्थ व्यक्तियो को रोगो के अज्ञात कारणो का पता करके लाभान्वित कर सकेगा ।

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